अनुच्छेद 17 — अस्पृश्यता का अंत
यह सीधे-सीधे कहता है कि अस्पृश्यता (Untouchability) समाप्त की जाती है और इसका कोई भी रूप कानूनन दंडनीय है।
अनुच्छेद 17, भारत का संविधान के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) में शामिल एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है।
यह भारत में सदियों से चली आ रही अस्पृश्यता (Untouchability) की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करता है और इसके अभ्यास को दंडनीय अपराध घोषित करता है।
7. अनुच्छेद 17 का महत्व
- यह भारत की सामाजिक व्यवस्था में न्याय व समानता सुनिश्चित करता है
- दलितों और वंचित समुदायों की गरिमा की रक्षा करता है
- सामाजिक भेदभाव और हिंसा में कमी लाता है
- भारत को एक आधुनिक, समतामूलक राष्ट्र बनाता है
1. अनुच्छेद 17 का मुख्य प्रावधान
क्या कहता है?
- “अस्पृश्यता का अंत किया जाएगा और इसका किसी भी रूप में व्यवहार करना कानून द्वारा दंडनीय होगा।”
अर्थ
भारत में किसी भी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर
- छूने से मना करना
- साथ नहीं बैठने देना
- सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश रोकना
- मंदिर/पानी के स्रोत/सड़क/शिक्षा संस्थान पर रोक लगाना
— सब अवैध और दंडनीय माना जाता है।
2. अस्पृश्यता (Untouchability) का अर्थ क्या है?
कानूनी अर्थ
संविधान में अस्पृश्यता का अर्थ सामाजिक प्रथा के रूप में लिया गया है, न कि शारीरिक स्वच्छता या धार्मिक नियमों के आधार पर।
अर्थ स्पष्ट रूप में
- “छुआछूत” या “अछूत बनाना”
- किसी जाति विशेष को सामाजिक रूप से ऊँचा–नीचा मानकर भेदभाव करना
यह कानूनन अपराध है।
3. अस्पृश्यता कैसे अपराध बनती है?
अनुच्छेद 17 के अनुसार:
- अस्पृश्यता पूर्णतः निषिद्ध है
- इसे किसी भी रूप में व्यवहार करना ही अपराध है
- अपराध व्यक्तिगत हो या सामूहिक, दोनों दंडनीय हैं
उदाहरण (कानूनी रूप से अपराध):
- दलित/SC व्यक्ति के मंदिर में प्रवेश पर रोक
- स्कूल में अलग बर्तन देना
- होटल में प्रवेश नहीं देना
- दाढ़ी/हेयरकट/व्यापार सेवाएँ न देना
- कुएँ/तालाब/पानी के स्रोत से पानी लेने से रोकना
4. अस्पृश्यता के खिलाफ बनाए गए कानून
अनुच्छेद 17 को लागू करने के लिए संसद ने प्रमुख रूप से दो कानून बनाए:
(1) अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955
बाद में संशोधित होकर इसे “सिविल राइट्स एक्ट, 1955” कहा गया।
क्या प्रावधान है?
- अस्पृश्यता का कोई भी व्यवहार अपराध
- इसके लिए जुर्माना + कारावास दोनों संभव
- सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश से रोकना दंडनीय
(2) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
यह कानून और भी कड़ा है।
क्या प्रावधान है?
- SC/ST के खिलाफ किए गए किसी भी अत्याचार, उत्पीड़न या भेदभाव के लिए तुरंत गिरफ्तारी
- कठोर सजा
- विशेष कोर्ट (Fast Track Courts)
- पीड़ित को सुरक्षा और मुआवजा
5. अनुच्छेद 17 मौलिक अधिकार क्यों है?
कारण
- यह सामाजिक समानता की नींव है
- जातिगत भेदभाव से मुक्ति दिलाता है
- मानव गरिमा (Human Dignity) को सुनिश्चित करता है
- संविधान के मूल मूल्य समानता (Equality) और न्याय (Justice) को मजबूत करता है
अनुच्छेद 17 यह सुनिश्चित करता है कि भारत एक जातिगत छुआछूत मुक्त समाज बने।
6. अनुच्छेद 17 की विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
| कठोर प्रावधान | अस्पृश्यता पूरी तरह प्रतिबंधित |
| दंडनीय अपराध | कानून इसे अपराध मानता है |
| नागरिक + राज्य दोनों पर लागू | नागरिकों और संस्थाओं दोनों के व्यवहार पर प्रतिबंध |
| सामाजिक क्रांति का आधार | समाज में जाति समानता की दिशा में कदम |
| Non-derogable Right | यह अधिकार किसी भी परिस्थिति में हटाया नहीं जा सकता |


