धारा 191 🚗 Motor Vehicles Act, 1988

🚗 Motor Vehicles Act, 1988

Chapter XIII – अपराध, दंड और प्रक्रिया

(Offences, Penalties and Procedure)

धारा 191 – अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध वाहन की बिक्री

(Sale of vehicle in contravention of the Act)

🔹 Section 191 का परिचय

Motor Vehicles Act, 1988 की धारा 191 (Section 191) उन मामलों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति:

  • किसी मोटर वाहन को
  • कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए
  • बेचता (Sale) या बेचने की अनुमति देता है

👉 यह धारा विशेष रूप से डीलर, विक्रेता (Seller) और वाहन मालिक की जिम्मेदारी तय करती है।

🎯 धारा 191 का उद्देश्य

Section 191 का उद्देश्य:

  • अवैध तरीके से वाहन की बिक्री को रोकना
  • यह सुनिश्चित करना कि बिक्री से पहले वाहन
    • पंजीकृत (Registered) हो
    • आवश्यक दस्तावेज पूरे हों
  • सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना

⚖️ Section 191 के अंतर्गत अपराध

यदि कोई व्यक्ति:

  • बिना पंजीकरण (Registration) वाले वाहन को बेचता है
  • कानून द्वारा आवश्यक शर्तें पूरी किए बिना वाहन की बिक्री करता है
  • ऐसे वाहन की बिक्री करता है जो अधिनियम या नियमों का उल्लंघन करता हो

👉 तो वह धारा 191 के तहत अपराधी माना जाएगा।

📌 यह धारा बेचने वाले व्यक्ति पर लागू होती है, न कि खरीददार पर।

🚸 Practical Examples (व्यावहारिक उदाहरण)

  • बिना Registration Number वाली नई गाड़ी बेचना
  • आवश्यक दस्तावेज़ (Form, Tax, Insurance) के बिना वाहन की बिक्री
  • प्रतिबंधित या गैर-अनुमोदित वाहन बेचना

💰 दंड का प्रावधान (Penalty under Section 191)

धारा 191 के अनुसार:

  • ₹5,000 तक का जुर्माना
  • या राज्य नियमों के अनुसार अन्य दंड

📌 परिस्थितियों के अनुसार अन्य धाराएँ भी जोड़ी जा सकती हैं।

🚔 अतिरिक्त कानूनी परिणाम

Section 191 के उल्लंघन पर:

  • वाहन की बिक्री को अवैध घोषित किया जा सकता है
  • वाहन जब्ती (Seizure) संभव
  • डीलर लाइसेंस पर कार्रवाई हो सकती है

📝 संक्षेप में (Summary)

बिंदु विवरण
Chapter Chapter XIII
धारा Section 191
अपराध अवैध रूप से वाहन बेचना
दोषी विक्रेता / डीलर
दंड ₹5,000 तक

⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

वाहन की बिक्री से पहले
Registration, Tax और Insurance
पूरा होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

⚖️ Legal Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी हेतु है। वास्तविक मामलों में दंड अधिनियम, नियमों और न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है।