🔶 Article 51 – अंतरराष्ट्रीय शांति और मित्रवत संबंध
(Article 51 – Promotion of International Peace and Security)
Article 51 भारतीय संविधान के भाग IV (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आता है।
यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति, मित्रवत संबंध और सहयोग को बढ़ावा दे।
➡️ यह अनुच्छेद भारत की वैश्विक नीति और शांतिपूर्ण सह–अस्तित्व की दिशा को निर्देशित करता है।
🟩 Article 51 का मूल भाव (Simple Meaning)
राज्य का दायित्व है कि—
- अन्य देशों के साथ शांति और मित्रता बनाए
- अंतरराष्ट्रीय समझौते और संधियों में भागीदारी करे
- युद्ध, हिंसा और संघर्ष के बजाय
सहयोग और समाधान की नीति अपनाए
➡️ इसका उद्देश्य है भारत को विश्व शांति और सुरक्षा का समर्थक बनाना।
🟦 Article 51 के प्रमुख तत्व
Article 51 मुख्य रूप से तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है—
1️⃣ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा (International Peace and Security)
2️⃣ मित्रवत अंतरराष्ट्रीय संबंध (Friendly Relations)
3️⃣ न्यायपूर्ण और सार्वभौमिक कानून (Respect for International Law and Treaty Obligations)
1️⃣ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
➡️ राज्य प्रयास करेगा कि—
- भारत किसी भी संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से हल करे
- अंतरराष्ट्रीय युद्ध और हिंसा से दूर रहे
- संयुक्त राष्ट्र और अन्य विश्व संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाए
2️⃣ मित्रवत अंतरराष्ट्रीय संबंध
➡️ उद्देश्य है—
- सभी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना
- राजनयिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना
- विवादों को बातचीत और समझौते से हल करना
3️⃣ न्यायपूर्ण और सार्वभौमिक कानून
➡️ राज्य को यह सुनिश्चित करना है कि—
- अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों का पालन हो
- मानवाधिकार, समुद्री सीमा और व्यापार संबंधी कानूनों में सहयोग हो
- विश्व समुदाय के प्रति जिम्मेदारी निभाई जाए
🟥 Article 51 के आधार पर भारत की पहल
Article 51 के कारण भारत—
- संयुक्त राष्ट्र का सक्रिय सदस्य
- शांति मिशन में योगदान (UN Peacekeeping)
- विश्व स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण में सहयोग
- मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन


