🔶 Article 36 – राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP)
(Article 36 – Definition of Directive Principles of State Policy)
Article 36 भारतीय संविधान के भाग IV (Part IV) का पहला अनुच्छेद है।
यह अनुच्छेद यह स्पष्ट करता है कि राज्य के नीति–निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy – DPSP) क्या हैं और उनका दायरा क्या है।
➡️ सरल शब्दों में, Article 36 DPSP की आधारशिला (Foundation Article) है।
🟦 Article 36 क्यों जरूरी है? (Importance)
- DPSP की सीमा तय करता है
- यह सुनिश्चित करता है कि—
- केंद्र
- राज्य
- स्थानीय निकाय
सभी DPSP का पालन करें
- Fundamental Rights और DPSP के बीच संवैधानिक संतुलन बनाता है
- “राज्य” की अलग-अलग व्याख्या से होने वाले भ्रम को रोकता है
🟦 Article 36 का मुख्य उद्देश्य
Article 36 का उद्देश्य है—
- यह तय करना कि DPSP किन पर लागू होंगे
- “राज्य (State)” शब्द का स्पष्ट और समान अर्थ देना
- Part III (Fundamental Rights) और Part IV (DPSP) के बीच संबंध स्थापित करना
🟧 “राज्य” (State) का अर्थ – Article 36 के अनुसार
Article 36 कहता है कि DPSP में “राज्य” का वही अर्थ होगा जो Article 12 में दिया गया है।
🟦 Article 12 के अनुसार “राज्य” में शामिल हैं—
- केंद्र सरकार (Union Government)
- राज्य सरकारें (State Governments)
- संसद (Parliament)
- राज्य विधानमंडल (State Legislature)
- स्थानीय प्राधिकरण (Local Authorities)
- नगर निगम
- नगरपालिका
- पंचायत
- अन्य प्राधिकरण (Other Authorities)
- सरकारी संस्थाएँ
- PSU (Public Sector Undertakings)
➡️ मतलब: DPSP केवल सरकार पर लागू होते हैं, आम नागरिकों पर नहीं।
🟩 Article 36 और DPSP का दायरा (Scope)
Article 36 यह स्पष्ट करता है कि—
- DPSP नागरिकों के अधिकार नहीं हैं
- ये राज्य के लिए नीति–निर्देशक सिद्धांत हैं
- राज्य को कानून बनाते समय और नीतियाँ तय करते समय
इन सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए



