CrPC धारा 46: गिरफ्तारी कैसे की जाती है? पुलिस की प्रक्रिया और नियम
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 46
गिरफ्तारी करने की विधि (How Arrest is Made)
- धारा 46 CrPC क्या है?
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 46 यह बताती है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी किस प्रकार की जाएगी। इस धारा के अनुसार पुलिस या अधिकृत अधिकारी को गिरफ्तारी करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।
गिरफ्तारी का मतलब है किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को कानूनी रूप से सीमित करना और उसे पुलिस की हिरासत में लेना।
- गिरफ्तारी कैसे की जाती है
धारा 46 के अनुसार गिरफ्तारी निम्न तरीके से की जाती है:
(1) शारीरिक रूप से पकड़कर
सामान्यतः गिरफ्तारी व्यक्ति को शारीरिक रूप से पकड़कर या उसे छूकर की जाती है।
यदि व्यक्ति स्वयं गिरफ्तारी के लिए समर्पण (surrender) कर देता है, तो शारीरिक बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती।
(2) बल का प्रयोग
यदि आरोपी गिरफ्तारी का विरोध करता है या भागने की कोशिश करता है, तो पुलिस आवश्यक होने पर उचित बल (reasonable force) का प्रयोग कर सकती है।
लेकिन बल का प्रयोग जरूरत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
(3) महिला की गिरफ्तारी
महिलाओं की गिरफ्तारी के संबंध में कुछ विशेष नियम हैं:
- महिला की गिरफ्तारी सामान्यतः सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं की जानी चाहिए
- यदि अत्यंत आवश्यक हो तो मजिस्ट्रेट की अनुमति से गिरफ्तारी की जा सकती है
- महिला की गिरफ्तारी के दौरान महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति आवश्यक होती है
(4) मृत्यु कारित करने वाली शक्ति
यदि कोई व्यक्ति ऐसे अपराध का आरोपी है जिसकी सजा मृत्यु दंड या आजीवन कारावास हो सकती है और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए गंभीर प्रतिरोध करता है, तो पुलिस आवश्यक होने पर घातक बल (deadly force) का प्रयोग कर सकती है।
लेकिन यह केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।
- धारा 46 का उद्देश्य
इस धारा का उद्देश्य है:
- गिरफ्तारी की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया निर्धारित करना
- पुलिस को आवश्यक शक्ति देना
- नागरिकों को अनावश्यक हिंसा और दुरुपयोग से बचाना
- महत्वपूर्ण बातें
- गिरफ्तारी करते समय अनावश्यक बल का प्रयोग नहीं किया जा सकता
- व्यक्ति यदि स्वेच्छा से समर्पण कर दे, तो बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती
- महिलाओं की गिरफ्तारी के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान हैं
- गिरफ्तारी हमेशा कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए
इस प्रकार धारा 46 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि गिरफ्तारी कानूनी, नियंत्रित और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए की जाए। ⚖️











