अनुच्छेद 16 — लोक सेवाओं में समान अवसर
अनुच्छेद 16, भारत का संविधान के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के तहत आता है। यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि सरकारी नौकरियों और सार्वजनिक पदों में हर नागरिक को समान अवसर मिले और किसी के साथ अनुचित भेदभाव न हो।
अनुच्छेद 16 का उद्देश्य
अनुच्छेद 16 का मुख्य लक्ष्य:
- सरकारी नौकरियों में समान अवसर सुनिश्चित करना
- भेदभाव समाप्त करना
- कमजोर वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना
- देश की लोक सेवाओं में सामाजिक न्याय लागू करना
इसमें 6 उप–खंड हैं:
- 16(1) – रोजगार में समान अवसर।
- 16(2) – धर्म, जाति, लिंग, वंश आदि के आधार पर भेदभाव नहीं।
- 16(3) – संसद निवास आधार पर प्रतिबंध लगा सकती है।
- 16(4) – पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण।
- 16(4A) – SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण।
- 16(4B) – पदोन्नति में आरक्षण की ‘क्रीमी लेयर’ अलग गणना।
- 16(5) – धार्मिक संस्थाओं में धार्मिक आधार पर भर्ती की छूट।
- 16(6) – EWS के लिए आरक्षण।
1. अनुच्छेद 16(1) — रोजगार और पदों में समान अवसर
क्या कहता है?
राज्य हर नागरिक को लोक सेवाओं में रोजगार के अवसरों में समानता प्रदान करेगा।
अर्थ
- कोई भी नागरिक योग्यता के आधार पर किसी भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है।
- राज्य (केंद्र/राज्य सरकार) सभी के लिए अवसरों को समान बनाएगा।
उदाहरण
- UPSC, SSC, राज्य PSC की परीक्षाएँ सभी नागरिकों के लिए खुली होती हैं।
- भर्ती प्रक्रिया में किसी नागरिक को व्यक्तिगत रूप से रोका नहीं जा सकता।
2. अनुच्छेद 16(2) — भेदभाव का निषेध
क्या कहता है?
किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, वंश, भाषा आदि के आधार पर सरकारी नौकरी में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
अर्थ
- सरकार किसी नौकरी को सिर्फ एक धर्म या एक जाति के लोगों के लिए आरक्षित नहीं कर सकती।
- पुरुष–महिला के आधार पर सरकारी नौकरी में भेदभाव नहीं किया जा सकता (कुछ विशेष मामलों को छोड़कर)।
उदाहरण
- “फ्लाँ धर्म के लोगों को ही नौकरी मिलेगी”—यह असंवैधानिक है।
- “केवल अमुक जाति के लोग आवेदन कर सकते हैं”—यह भी अवैध है।
3. अनुच्छेद 16(3) — निवास (Domicile) आधारित प्रतिबंध लगाने की शक्ति
क्या कहता है?
संसद (Parliament) यह तय कर सकती है कि कुछ विशेष पदों के लिए व्यक्ति को विशिष्ट राज्य का निवासी (Domicile) होना जरूरी है।
क्यों?
कई सेवाएँ ऐसी होती हैं जहाँ स्थानीय निवासियों की आवश्यकता होती है—जैसे पुलिस, भूमि-संबंधित विभाग, राज्य सेवाएँ आदि।
उदाहरण
- कुछ राज्यों के लिए राज्य PSC नौकरियों में “स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र” की आवश्यकता।
- जम्मू-कश्मीर में “Domicile based recruitment”।
4. अनुच्छेद 16(4) — पिछड़े वर्गों (SC/ST/OBC/SEBC) के लिए आरक्षण
क्या कहता है?
राज्य उन पिछड़े वर्गों (Backward Classes) को आरक्षण दे सकता है जो राज्य की सेवाओं (सरकारी नौकरियों) में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं रखते।
अर्थ
यह SC, ST, और OBC वर्गों के लिए सरकारी नौकरी में आरक्षण का संवैधानिक आधार है।
उदाहरण
- SC / ST के लिए नौकरी में आरक्षण
- OBC के लिए 27% आरक्षण (केंद्र सरकार में)
5. अनुच्छेद 16(4A) — प्रमोशन में SC/ST के लिए आरक्षण
(77th Constitutional Amendment, 1995)
क्या कहता है?
राज्य SC और ST वर्ग के लिए प्रमोशन (उन्नति) में भी आरक्षण दे सकता है।
अर्थ
- नौकरी में सिर्फ भर्ती ही नहीं, बल्कि प्रमोशन में भी SC/ST के लिए आरक्षण संभव है।
6. अनुच्छेद 16(4B) — रिपीटेड रिक्तियों को अलग कोटा मानना
(81st Constitutional Amendment, 2000)
क्या कहता है?
आरक्षित वर्ग के लिए जो रिक्तियाँ (vacancies) पिछली बार भर नहीं पाई गई थीं, उन्हें अलग से माना जाएगा और भविष्य की भर्ती में जोड़कर भरा जा सकता है।
अर्थ
- इससे आरक्षित वर्ग की कुल सीटें सीमित न होकर आगे जोड़कर भरी जा सकती हैं।
7. अनुच्छेद 16(5) — धार्मिक संस्थाओं में आवश्यक पदों पर छूट
क्या कहता है?
किसी विशेष धार्मिक संस्था या धर्म की गतिविधियों से जुड़े पदों पर सिर्फ उसी धर्म के लोगों को रखने की अनुमति दी जा सकती है।
अर्थ
यह सामान्य भेदभाव नहीं माना जाता क्योंकि धार्मिक संस्थानों की विशिष्ट आवश्यकताएँ होती हैं।
उदाहरण
- मंदिरों में पुजारी
- मस्जिदों में इमाम
- गुरुद्वारा/चर्च के धार्मिक सेवक
इन पदों पर संबंधित धर्म का होना आवश्यक माना जाता है।
8. अनुच्छेद 16(6) — EWS (Economically Weaker Sections) आरक्षण
(103rd Amendment Act, 2019 द्वारा जोड़ा गया)
क्या कहता है?
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए सरकारी नौकरियों में 10% तक आरक्षण दिया जा सकता है।
अर्थ
पहली बार गरीब सामान्य/अनारक्षित वर्ग को भी आरक्षण शामिल किया गया।


