Chapter XIII – अपराध, दंड और प्रक्रिया 🚗 Motor Vehicles Act, 1988
🚗 Motor Vehicles Act, 1988
Chapter XIII – अपराध, दंड और प्रक्रिया
(Offences, Penalties and Procedure)
धारा 209 – वाहन के अनधिकृत संशोधन या बदलाव
(Unauthorized alteration or modification of vehicle)
🔹 Section 209 का परिचय
Motor Vehicles Act, 1988 की धारा 209 (Section 209) उन मामलों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति:
- किसी वाहन में अनधिकृत बदलाव (Alteration / Modification) करता है
- Vehicle की मूल संरचना, मोटर क्षमता, या सुरक्षा उपकरण को बदल देता है
- सार्वजनिक सड़क पर ऐसा वाहन चलाता है
👉 इसे Unauthorized Vehicle Modification कहा जाता है।
🎯 धारा 209 का उद्देश्य
Section 209 का उद्देश्य:
- सड़क पर केवल सुरक्षित और मानक वाहन चलाना
- अनधिकृत परिवर्तन से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना
- वाहन मालिक और चालक की जिम्मेदारी तय करना
⚖️ Section 209 के अंतर्गत अपराध
यदि कोई व्यक्ति:
- Engine, Body, Chassis या अन्य भागों में नियमों के खिलाफ बदलाव करता है
- Vehicle की क्षमता या सुरक्षा उपकरणों में बदलाव करता है
- Modified Vehicle को सड़क पर चलाता है
👉 तो वह धारा 209 के तहत अपराधी माना जाएगा।
📌 जिम्मेदारी वाहन मालिक और चालक दोनों पर लागू होती है।
🚸 Practical Examples (व्यावहारिक उदाहरण)
- बाइक या कार का Engine Capacity बढ़ाना
- Vehicle का Exhaust System या Horn नियमों के खिलाफ बदलना
- Vehicle Body / Chassis में अनधिकृत बदलाव करना
💰 दंड का प्रावधान (Penalty under Section 209)
- ₹5,000 तक का जुर्माना
- या Vehicle Seizure (वाहन जब्ती)
- या दोनों
📌 बार-बार उल्लंघन पर दंड बढ़ सकता है।
🚔 अतिरिक्त कानूनी परिणाम
Section 209 के उल्लंघन पर:
- Vehicle Permit या License पर कार्रवाई
- दुर्घटना होने पर अतिरिक्त जिम्मेदारी
- Insurance Claim अमान्य हो सकता है
📝 संक्षेप में (Summary)
| बिंदु | विवरण |
| Chapter | Chapter XIII |
| धारा | Section 209 |
| अपराध | Unauthorized alteration / modification of vehicle |
| दोषी | वाहन चालक / वाहन मालिक |
| दंड | ₹5,000 / Vehicle Seizure |
⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु
वाहन में अनधिकृत बदलाव
सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं,
बल्कि सड़क सुरक्षा और आम जनता के लिए खतरा है।
⚖️ Legal Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी हेतु है। वास्तविक मामलों में दंड न्यायालय के विवेक, संशोधन की गंभीरता और राज्य नियमों पर निर्भर करता है।
