धारा 184 – खतरनाक तरीके से वाहन चलाना

🚗 Motor Vehicles Act, 1988

Chapter XIII – अपराध, दंड और प्रक्रिया

(Offences, Penalties and Procedure)

धारा 184 – खतरनाक तरीके से वाहन चलाना

(Driving Dangerously)

🔹 Section 184 का परिचय

Motor Vehicles Act, 1988 की धारा 184 (Section 184) उन मामलों से संबंधित है जहाँ कोई व्यक्ति:

  • सार्वजनिक सड़क (Public Road) पर
  • ऐसा वाहन चलाता है जो
  • मानव जीवन या सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा (Danger) बन सकता है

👉 इसे Dangerous Driving कहा जाता है।

🎯 धारा 184 का उद्देश्य

Section 184 का मुख्य उद्देश्य:

  • लापरवाह और जोखिमपूर्ण ड्राइविंग को रोकना
  • सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना

⚖️ Section 184 के अंतर्गत अपराध

निम्नलिखित स्थितियों में धारा 184 लागू होती है:

  • तेज़ रफ्तार में अचानक कट मारना
  • ज़िग-ज़ैग (Zig-Zag) ड्राइविंग
  • ट्रैफिक नियमों की अनदेखी
  • मोबाइल फोन का खतरनाक उपयोग करते हुए ड्राइविंग
  • ऐसी ड्राइविंग जिससे किसी व्यक्ति को चोट या जान का खतरा हो

📌 दुर्घटना होना आवश्यक नहीं है, खतरे की संभावना ही पर्याप्त है

🚸 Practical Examples (व्यावहारिक उदाहरण)

  • रेसिंग करते हुए सड़क पर वाहन चलाना
  • भीड़भाड़ वाले इलाके में स्टंट करना
  • रेड लाइट जंप करते हुए तेज़ गति में ड्राइव करना

💰 दंड का प्रावधान (Penalty under Section 184)

🔹 पहली बार अपराध (First Offence)

  • ₹5,000 तक का जुर्माना
  • 6 महीने तक कारावास,
  • या दोनों

🔹 दूसरी बार या पुनरावृत्ति (Subsequent Offence – within 3 years)

  • ₹10,000 तक जुर्माना
  • 2 वर्ष तक कारावास,
  • या दोनों

📌 Driving Licence suspend या cancel भी किया जा सकता है।

🚔 अन्य कानूनी परिणाम

Section 184 के उल्लंघन पर:

  • वाहन जब्ती (Vehicle Seizure)
  • लाइसेंस निलंबन (Suspension of Licence)
  • अन्य धाराएँ (Sections 279 BNS / IPC, 337/338) भी लग सकती हैं

📝 संक्षेप में (Summary)

बिंदु विवरण
Chapter Chapter XIII
धारा Section 184
अपराध Dangerous Driving
दोषी वाहन चालक
दंड ₹5,000–₹10,000 / जेल

⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

खतरनाक ड्राइविंग का मूल्यांकन
ड्राइवर के आचरण (Conduct) और
सड़क की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

⚖️ Legal Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी हेतु है। वास्तविक मामलों में दंड न्यायालय के विवेक, परिस्थितियों और राज्य नियमों पर निर्भर करता है।