धारा 182 – गलत सूचना देना या गलत विवरण प्रस्तुत करना

🚗 Motor Vehicles Act, 1988

Chapter XIII – अपराध, दंड और प्रक्रिया

(Offences, Penalties and Procedure)

धारा 182 – गलत सूचना देना या गलत विवरण प्रस्तुत करना

(False Information / False Report)

🔹 Section 182 का परिचय

Motor Vehicles Act, 1988 की धारा 182 (Section 182) उन व्यक्तियों पर लागू होती है जो:

  • लाइसेंस
  • वाहन पंजीकरण (Registration)
  • परमिट (Permit)
  • या किसी अन्य वैधानिक उद्देश्य के लिए

👉 जानबूझकर गलत सूचना (False Information) या झूठा विवरण (False Particulars) प्रस्तुत करते हैं।

🎯 धारा 182 का उद्देश्य

Section 182 का मुख्य उद्देश्य:

  • सरकारी रिकॉर्ड की शुद्धता बनाए रखना
  • फर्जी लाइसेंस और गलत पंजीकरण को रोकना
  • प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करना

⚖️ Section 182 के अंतर्गत अपराध

यदि कोई व्यक्ति:

  • लाइसेंस प्राप्त करने के लिए
  • वाहन पंजीकरण, नवीनीकरण या परमिट हेतु
  • झूठा पता, गलत उम्र, फर्जी दस्तावेज देता है

👉 तो वह धारा 182 के तहत अपराधी माना जाएगा।

📌 यह अपराध जानबूझकर (Knowingly) किया जाना आवश्यक है।

🚸 Practical Examples (व्यावहारिक उदाहरण)

  • गलत उम्र दिखाकर Driving Licence बनवाना
  • फर्जी पता या पहचान पत्र देना
  • चोरी के वाहन का गलत विवरण देना
  • Permit या Registration के लिए गलत जानकारी देना

💰 दंड का प्रावधान (Penalty under Section 182)

धारा 182 के अनुसार:

  • पहली बार अपराध:
    👉 ₹500 तक का जुर्माना
  • दूसरी या उसके बाद:
    👉 ₹1,000 तक का जुर्माना

📌 इसमें कारावास (Imprisonment) का प्रावधान नहीं है।

🚔 अन्य कानूनी परिणाम

Section 182 के उल्लंघन पर:

  • लाइसेंस या परमिट रद्द (Cancel) किया जा सकता है
  • आवेदन अस्वीकृत (Rejected) हो सकता है
  • अन्य धाराएँ भी लग सकती हैं (जैसे IPC / BNS के अंतर्गत)

📝 संक्षेप में (Summary)

बिंदु विवरण
Chapter Chapter XIII
धारा Section 182
अपराध गलत सूचना देना
दोषी आवेदनकर्ता
दंड ₹500 / ₹1,000

⚠️ महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु

“गलती से” दी गई जानकारी और
“जानबूझकर” दी गई गलत जानकारी में अंतर है।
धारा 182 जानबूझकर किए गए कृत्य पर लागू होती है।

⚖️ Legal Disclaimer

यह जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य कानूनी समझ के लिए है। वास्तविक मामलों में निर्णय संबंधित प्राधिकरण और न्यायालय द्वारा तथ्यों के आधार पर लिया जाता है।