दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 74
अदालत के आदेश पर गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा और निगरानी (Safeguarding Arrested Person Under Court’s Order)
1. धारा 74 CrPC क्या है?
धारा 74 यह प्रावधान करती है कि जब कोई व्यक्ति अदालत के आदेश पर गिरफ्तार होता है, तो उसकी सुरक्षा और हिरासत का पूरा ध्यान रखा जाए।
इसका उद्देश्य है कि गिरफ्तारी प्रक्रिया सुरक्षित, न्यायिक निगरानी में और मानव अधिकार-सुरक्षित हो।
2. मजिस्ट्रेट और पुलिस की जिम्मेदारी
- मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे कि गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा और मानव अधिकार सुरक्षित हों।
- पुलिस और हिरासत अधिकारी आरोपी की देखभाल और संरक्षित निगरानी करें।
- हिरासत में कोई भी अनावश्यक कठिनाई या अत्याचार न हो।
3. नियम और शर्तें
- हिरासत केवल अधिकृत स्थान या जेल में हो।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सुरक्षा और अलग निगरानी हो।
- हिरासत प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायिक अनुमति के अधीन हो।
4. धारा 74 का उद्देश्य
- गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा और मानव अधिकार सुनिश्चित करना
- हिरासत और गिरफ्तारी प्रक्रिया को कानूनी और न्यायिक निगरानी में रखना
- पुलिस और अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करना
5. संवैधानिक महत्व
धारा 74 अनुच्छेद 21 और 22 से जुड़ी हुई है:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और हिरासत प्रक्रिया में न्याय सुनिश्चित करना
6. न्यायालय के दिशानिर्देश
D.K. Basu v. State of West Bengal
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा और मानव अधिकार सुनिश्चित करना मजिस्ट्रेट और पुलिस की जिम्मेदारी है।
- महिला और नाबालिग मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी जरूरी है।
- यह आदेश हिरासत प्रक्रिया को पारदर्शी और मानव अधिकार-सुरक्षित बनाता है।
7. महत्वपूर्ण बातें
- मजिस्ट्रेट और पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सावधानी और अलग निगरानी हो।
- हिरासत में किसी भी प्रकार का अत्याचार या अनावश्यक कठिनाई न हो।
- धारा 74 गिरफ्तारी प्रक्रिया को कानूनी, सुरक्षित और न्यायिक निगरानी वाली बनाती है।
इस प्रकार धारा 74 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि अदालत के आदेश पर गिरफ्तार व्यक्ति की हिरासत और सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित और मानव अधिकार-सुरक्षित हो। ⚖️
