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अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता

🔶 अनुच्छेद 25 — धर्म की स्वतंत्रता

(Article 25 – Freedom of Conscience and Free Profession, Practice and Propagation of Religion)

अनुच्छेद 25 भारतीय संविधान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है जो प्रत्येक व्यक्ति को धर्म का पालन करने, मानने और प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है।
यह अधिकार भारत के सभी व्यक्तियों (citizens + non-citizens) पर लागू होता है।

4 उपखंड:

  1. 25(1) – धार्मिक स्वतंत्रता
  2. 25(2)(a) – सामाजिक सुधार के लिए राज्य दखल कर सकता है
  3. 25(2)(b) – हिंदुओं में दलित/अन्य वर्गों को मंदिर-प्रवेश आदि
  4. Explanation 1 & 2 – “Hindu” में Sikh, Jain, Buddhist शामिल

🟩 अनुच्छेद 25 क्या कहता है? (Main Provision)

हर व्यक्ति को निम्न अधिकार प्राप्त हैं—

1. अंतरात्मा की स्वतंत्रता (Freedom of Conscience)

व्यक्ति अपनी इच्छा से—

2. धर्म को मानने का अधिकार (Right to Profess)

व्यक्ति सार्वजनिक या निजी रूप से अपने धर्म की आस्था व्यक्त कर सकता है।

3. धर्म का पालन करने का अधिकार (Right to Practice)

व्यक्ति अपने धर्म के रीति-रिवाज, अनुष्ठान, पूजा-पद्धतियाँ स्वतंत्र रूप से कर सकता है।

4. धर्म के प्रचार का अधिकार (Right to Propagate)

अपना धर्म दूसरों तक पहुँचाने का अधिकार।
➡️ लेकिन जबरदस्ती, लालच, छल या दबाव डालकर धर्मांतरण करने का अधिकार नहीं

🟩 1. अनुच्छेद 25(1) – धार्मिक स्वतंत्रता (Freedom of Religion)

यह अनुच्छेद प्रत्येक व्यक्ति को चार प्रकार की स्वतंत्रता देता है:

(a) Freedom of Conscience – अंतरात्मा की स्वतंत्रता

व्यक्ति चाहे तो—

(b) To Profess Religion – धर्म को मानना/घोषित करना

व्यक्ति सार्वजनिक रूप से या निजी रूप से अपने धर्म को व्यक्त कर सकता है।

(c) To Practice Religion – धर्म का पालन

व्यक्ति पूजा-पद्धति, अनुष्ठान, रीतियों आदि को स्वतंत्र रूप से कर सकता है।

(d) To Propagate Religion – धर्म का प्रसार

व्यक्ति दूसरों को अपने धर्म के बारे में बता सकता है
लेकिन—
👉 जबरन, लालच, धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराना इस अधिकार में शामिल नहीं।

🔸 इस उप-खंड पर तीन प्रकार के प्रतिबंध लागू होते हैं:

🟩 2. अनुच्छेद 25(2)(a) – सामाजिक सुधार के लिए राज्य का हस्तक्षेप (Social Welfare & Reform)

इस उप-खंड का उद्देश्य है—
👉 धर्म की आड़ में होने वाली सामाजिक बुराइयों को रोकना।

इसके अंतर्गत राज्य को अधिकार है कि वह:

उदाहरण:

👉 इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सामाजिक न्याय के अनुरूप बनाना है।

🟩 3. अनुच्छेद 25(2)(b) – हिंदुओं के धार्मिक संस्थानों में सभी वर्गों को प्रवेश का अधिकार

इस उप-खंड में विशेष रूप से हिंदुओं के धार्मिक स्थलों की बात की गई है।

इसमें राज्य को यह शक्ति दी गई है कि वह कानून बनाए—

➡️ जिससे हिंदुओं के सार्वजनिक धार्मिक संस्थानों में
सभी वर्गों, दलितों, पिछड़े वर्गों, हरिज़नों को
समान प्रवेश और समान उपयोग का अधिकार मिले।

उद्देश्य:

उदाहरण:

🟦 4. Explanation 1 & 2 – “Hindu” शब्द का विस्तारित अर्थ

Explanation 1

“Hindu” शब्द में निम्न सभी शामिल हैं—

👉 अर्थात, हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं से जुड़े कानून इन सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होंगे।

Explanation 2

“Hindu religious institutions” शब्द का अर्थ—
➡️ कोई भी धार्मिक संस्था जो हिंदू, सिख, जैन या बौद्ध समुदाय के लिए खुली हो।

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