Article 45 – बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल

(Article 45 – Provision for Early Childhood Care and Education)

Article 45 भारतीय संविधान के भाग IV (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आता है।
यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए
प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा (Early Childhood Care and Education – ECCE) की व्यवस्था करे।

➡️ यह अनुच्छेद बाल विकास और शिक्षा की नींव से जुड़ा हुआ है।

🟩 Article 45 का उद्देश्य
  1. बच्चों के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना
  2. कुपोषण और बाल मृत्यु दर कम करना
  3. शिक्षा की मजबूत नींव बनाना
  4. सामाजिक असमानता कम करना
  5. भविष्य के नागरिकों को सक्षम बनाना
🟩 Article 45 का इतिहास (Background)

🔹 मूल रूप

  • राज्य को यह निर्देश था कि वह
    14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करे।

🔹 संशोधित रूप

  • 86वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2002
    द्वारा Article 45 में संशोधन किया गया।
  • निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को
    👉 Article 21A (मौलिक अधिकार) बना दिया गया।

➡️ इसके बाद Article 45 को
6 वर्ष से कम आयु के बच्चों तक सीमित कर दिया गया।

🟦 Article 45 का वर्तमान स्वरूप (Present Scope)

राज्य यह प्रयास करेगा कि—

  • 0 से 6 वर्ष के बच्चों को
  • प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा मिले
  • जिससे उनका
    • शारीरिक
    • मानसिक
    • बौद्धिक
    • नैतिक
      विकास हो।
🟧 प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा (ECCE) का अर्थ

ECCE में शामिल है—

  • पोषण (Nutrition)
  • स्वास्थ्य सेवाएँ
  • टीकाकरण
  • पूर्व-प्राथमिक शिक्षा
  • खेल और सामाजिक गतिविधियाँ

➡️ इसका उद्देश्य है—
बच्चे के समग्र विकास की नींव रखना।

🟥 न्यायालय की दृष्टि (Judicial Interpretation)

Unni Krishnan Case (1993)

  • शिक्षा को जीवन के अधिकार से जोड़ा गया।

Mohini Jain Case (1992)

  • शिक्षा व्यक्ति की गरिमा से जुड़ी है।

➡️ Article 45 ने
Article 21A का मार्ग प्रशस्त किया।

🟦 Article 45 के आधार पर सरकारी योजनाएँ

Article 45 के कारण—

  • ICDS (Integrated Child Development Services)
  • आंगनवाड़ी योजना
  • पोषण अभियान
  • प्री-प्राइमरी शिक्षा कार्यक्रम