अनुच्छेद 46 अनुसूचित जाति, जनजाति एवं कमजोर वर्गों का संरक्षण

(Article 46 – Promotion of Educational and Economic Interests of SCs, STs and Other Weaker Sections)

Article 46 भारतीय संविधान के भाग IV (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आता है।
यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य कमजोर वर्गों
के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की विशेष रूप से रक्षा करे।

➡️ यह अनुच्छेद सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का आधार है।

🟧 Article 46 के प्रमुख उद्देश्य
  1. शिक्षा में समान अवसर
  2. आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना
  3. सामाजिक भेदभाव समाप्त करना
  4. ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई
  5. समानता आधारित समाज का निर्माण
🟩 Article 46 का मूल भाव (Simple Meaning)

राज्य का कर्तव्य है कि वह—

  • SC, ST और कमजोर वर्गों के
    शिक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे
  • उन्हें सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से बचाए
🟦 कमजोर वर्ग (Weaker Sections) कौन हैं?

Article 46 में कमजोर वर्गों में शामिल हैं—

  1. अनुसूचित जातियाँ (SC)
  2. अनुसूचित जनजातियाँ (ST)
  3. अन्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (OBCs)
  4. निर्धन, भूमिहीन मजदूर, वंचित समूह
🟦 Article 46 और आरक्षण नीति

Article 46 ही—

  • आरक्षण नीति (Reservation Policy)
    का संवैधानिक आधार है
  • शिक्षा और रोजगार में
    विशेष प्रावधानों को वैधता देता है

➡️ हालांकि आरक्षण की सीमा
Fundamental Rights के अनुरूप होनी चाहिए।

🟥 न्यायालय की दृष्टि (Judicial Interpretation)

Indra Sawhney Case (1992)

  • सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को
    आरक्षण का आधार माना गया।

M. Nagaraj Case

  • आरक्षण का उद्देश्य
    पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना है।
🟦 Article 46 के आधार पर बने कानून और योजनाएँ

Article 46 के कारण—

  • SC/ST (Prevention of Atrocities) Act
  • छात्रवृत्ति योजनाएँ
  • आरक्षण नीति
  • विशेष विकास योजनाएँ