अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन का संगठन
(Article 48 – Organisation of Agriculture and Animal Husbandry)
Article 48 भारतीय संविधान के भाग IV (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आता है।
यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह कृषि और पशुपालन को
आधुनिक एवं वैज्ञानिक ढंग से संगठित करे।
➡️ यह अनुच्छेद ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पशु संरक्षण से जुड़ा है।
🟩 Article 48 का मूल भाव (Simple Meaning)
राज्य यह प्रयास करेगा कि—
- कृषि को
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से विकसित किया जाए - पशुपालन को
संगठित और उन्नत किया जाए - दुधारू और कामकाजी पशुओं की
नस्ल सुधार (Breed Improvement) किया जाए - गाय, बछड़ा और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर रोक लगाई जाए
🟦 Article 48 के प्रमुख तत्व
Article 48 मुख्य रूप से चार बातों पर केंद्रित है—
1️⃣ कृषि का वैज्ञानिक संगठन
2️⃣ पशुपालन का विकास
3️⃣ पशु नस्ल सुधार
4️⃣ पशु संरक्षण (विशेष रूप से गाय)
🟧 1️⃣ कृषि का वैज्ञानिक संगठन
➡️ राज्य का उद्देश्य—
- उन्नत बीजों का प्रयोग
- सिंचाई सुविधाओं का विकास
- आधुनिक कृषि यंत्र
- जैविक और टिकाऊ खेती
➡️ इससे
उत्पादन और किसानों की आय बढ़ती है।
🟧 2️⃣ पशुपालन का विकास
➡️ इसमें शामिल है—
- डेयरी विकास
- मुर्गीपालन
- पशु स्वास्थ्य सेवाएँ
- टीकाकरण
➡️ पशुपालन
ग्रामीण रोजगार का बड़ा स्रोत है।
🟧 3️⃣ पशु नस्ल सुधार (Breed Improvement)
➡️ राज्य प्रयास करेगा—
- दुधारू पशुओं की
उन्नत नस्ल विकसित करने का - ताकि
दूध और दुग्ध उत्पादों का
उत्पादन बढ़े।
🟧 4️⃣ पशु संरक्षण और गाय वध निषेध
➡️ Article 48 विशेष रूप से कहता है—
- गाय
- बछड़ा
- दुधारू और कामकाजी पशु
के वध पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जाए।
🟥 न्यायालय की दृष्टि (Judicial Interpretation)
State of Gujarat v. Mirzapur Moti Kureshi Kassab Jamat (2005)
- सुप्रीम कोर्ट ने
गाय वध पर प्रतिबंध को
संवैधानिक रूप से वैध माना। - Article 48 को
सामाजिक और आर्थिक हित में बताया।
🟦 Article 48 के आधार पर सरकारी योजनाएँ
Article 48 के कारण—
- राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन
- कृषि सुधार योजनाएँ
- गाय संरक्षण कानून






