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BNS धारा 18 – उकसाना / भड़काना

📘 BNS (भारतीय न्याय संहिता – Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023)

🧾 Section 18 (धारा 18) – उकसाना / भड़काना

(Abetment – Instigation of an offence)

🟢 Section 18 का आसान मतलब:

अगर कोई व्यक्ति:

✔️ किसी को अपराध करने के लिए उकसाता है
✔️ भड़काता है
✔️ बहकाता है
✔️ प्लान बनाने में मदद करता है
✔️ मानसिक रूप से तैयार करता है
✔️ अपराध के लिए प्रेरित करता है

👉 तो वह व्यक्ति भी अपराधी माना जाएगा ⚖️
भले ही उसने खुद अपराध न किया हो।

🧠 आम भाषा में समझो:

अगर कोई बोले:

“तू मार दे उसे”
“चोरी कर ले, कुछ नहीं होगा”
“डरा मत, मैं साथ हूँ”
“ये काम कर दे, मैं संभाल लूँगा”

👉 और सामने वाला अपराध कर दे
तो उकसाने वाला भी अपराधी होगा।

📌 Simple Examples:

Example 1:

A ने B को कहा:
“उस आदमी को मार दे”
B ने सच में मार दिया
➡️ A भी अपराधी
➡️ B भी अपराधी

Example 2:

किसी ने चोरी के लिए प्लान बनाया
और दूसरे को भेजा
➡️ भेजने वाला भी अपराधी
➡️ करने वाला भी अपराधी

Example 3:

कोई व्यक्ति मानसिक रूप से भड़काता है
➡️ अपराध करवाता है
➡️ खुद हाथ नहीं लगाता
➡️ फिर भी अपराधी

🧠 Core Rule:

जो अपराध करवाता है, वो भी अपराधी होता है

मतलब:
हाथ से किया = अपराध
दिमाग से करवाया = अपराध
दोनों बराबर ⚖️

🚫 कब लागू नहीं होगा:

अगर:

👉 तो Section 18 लागू नहीं होगा ❌

⚖️ दंड (Punishment):

इस धारा में अलग से सज़ा तय नहीं है
क्योंकि ये एक liability section है
👉 सज़ा उस अपराध वाली धारा में मिलेगी
जैसे हत्या, चोरी, बलात्कार, डकैती, हमला आदि।

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