दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 57
गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता
1. धारा 57 CrPC क्या है?
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 57 यह प्रावधान करती है कि पुलिस किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक अपनी हिरासत में नहीं रख सकती, जब तक कि उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश न कर दिया जाए।
इस 24 घंटे की अवधि में गिरफ्तारी से लेकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने तक का समय शामिल होता है, लेकिन इसमें अदालत तक ले जाने में लगने वाला आवश्यक समय (Journey Time) शामिल नहीं किया जाता।
इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह है कि पुलिस किसी व्यक्ति को लंबे समय तक अवैध हिरासत में न रख सके और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित हो।
2. 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य
धारा 57 के अनुसार:
- पुलिस किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए बाध्य है।
- यदि जांच पूरी नहीं हुई है, तो पुलिस को मजिस्ट्रेट से आगे की हिरासत (Remand) की अनुमति लेनी होती है।
यदि पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखती है, तो यह अवैध हिरासत (Illegal Detention) मानी जाएगी।
3. संवैधानिक प्रावधान
यह प्रावधान भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(2) से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि:
- गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना आवश्यक है
- बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के उसे अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता
इस प्रकार धारा 57, संविधान में दिए गए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करती है।
4. धारा 57 और धारा 167 CrPC का संबंध
जब पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है और 24 घंटे के भीतर जांच पूरी नहीं हो पाती, तो पुलिस मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके धारा 167 CrPC के तहत रिमांड (Remand) मांग सकती है।
मजिस्ट्रेट परिस्थितियों को देखकर:
- पुलिस रिमांड (Police Custody)
- न्यायिक हिरासत (Judicial Custody)
दे सकता है।
5. धारा 57 का उद्देश्य
इस धारा का मुख्य उद्देश्य है:
- पुलिस द्वारा मनमानी हिरासत को रोकना
- गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया को न्यायिक निगरानी के अधीन रखना
6. महत्वपूर्ण न्यायालय निर्णय
D.K. Basu v. State of West Bengal
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया कानून के अनुसार और पारदर्शी होनी चाहिए
- गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है
7. महत्वपूर्ण बातें
- पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के हिरासत में नहीं रख सकती।
- 24 घंटे के भीतर आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है।
- यदि जांच अधूरी हो, तो पुलिस को मजिस्ट्रेट से रिमांड लेना पड़ता है।
- यह प्रावधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार धारा 57 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना न्यायिक निगरानी के हिरासत में न रखा जाए और उसकी स्वतंत्रता तथा अधिकारों की सुरक्षा बनी रहे। ⚖️
