पुलिस हिरासत में आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का आदेश
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 62
पुलिस हिरासत में आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का आदेश (Remand of Arrested Person to Police Custody by Magistrate)
1. धारा 62 CrPC क्या है?
धारा 62 यह प्रावधान करती है कि जब कोई आरोपी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है, तो मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत में भेजने (Police Custody) का आदेश दे सकता है, यदि वह जाँच या मामले की प्रकृति के लिए आवश्यक हो।
इसका उद्देश्य है कि पुलिस को जाँच के लिए आरोपी तक उचित समय तक पहुंच मिल सके, लेकिन हिरासत न्यायिक निगरानी में और सुरक्षित तरीके से हो।
2. मजिस्ट्रेट की शक्ति
- मजिस्ट्रेट आरोपी को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दे सकता है।
- हिरासत का समय केवल आवश्यक अवधि तक होनी चाहिए।
- मजिस्ट्रेट आदेश देते समय आरोपी के मानव अधिकार और सुरक्षा का ध्यान रखता है।
3. पुलिस हिरासत के नियम
- हिरासत में आरोपी को अनावश्यक कठिनाई या अत्याचार से बचाया जाए।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सुरक्षा और महिला/बाल अधिकारी की निगरानी हो।
- पुलिस हिरासत केवल जाँच और कानूनी प्रक्रिया के लिए हो।
4. धारा 62 का उद्देश्य
- पुलिस हिरासत को कानूनी और न्यायिक निगरानी में रखना
- जाँच और सबूत इकट्ठा करने के लिए आरोपी तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना
- हिरासत प्रक्रिया को मानव अधिकार-सुरक्षित और पारदर्शी बनाना
5. संवैधानिक महत्व
धारा 62 अनुच्छेद 21 और 22 से जुड़ी हुई है:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अनुच्छेद 22: मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस हिरासत में रखना गैरकानूनी
6. न्यायालय के दिशानिर्देश
D.K. Basu v. State of West Bengal
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को पुलिस हिरासत का आदेश देते समय आरोपी की सुरक्षा और मानवाधिकारों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
- महिला और नाबालिग के मामलों में विशेष निगरानी और सुरक्षा आवश्यक है।
- यह आदेश पुलिस हिरासत को पारदर्शी और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाता है।
7. महत्वपूर्ण बातें
- मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत का आदेश केवल आवश्यक अवधि के लिए दे सकता है।
- हिरासत में आरोपी के मानव अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में अतिरिक्त सुरक्षा और महिला/बाल अधिकारी की निगरानी हो।
- धारा 62 गिरफ्तारी और हिरासत प्रक्रिया को कानूनी और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाती है।
इस प्रकार धारा 62 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि पुलिस हिरासत न्यायिक अनुमति, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से हो, और हिरासत का दुरुपयोग न हो। ⚖️











