दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 79
पुलिस हिरासत से न्यायिक हिरासत में स्थानांतरण की शर्तें (Conditions for Remanding from Police Custody to Judicial Custody)
1. धारा 79 CrPC क्या है?
धारा 79 यह प्रावधान करती है कि जब कोई आरोपी पुलिस हिरासत में होता है, तो उसे न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले मजिस्ट्रेट द्वारा तय शर्तों का पालन अनिवार्य है।
इसका उद्देश्य है कि हिरासत प्रक्रिया कानूनी, सुरक्षित और न्यायिक निगरानी में हो।
2. मजिस्ट्रेट और पुलिस की जिम्मेदारी
- मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करे कि पुलिस हिरासत से न्यायिक हिरासत में भेजना केवल आवश्यक परिस्थितियों में हो।
- पुलिस और मजिस्ट्रेट को आरोपी के मानव अधिकार, सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
- शर्तों का उल्लंघन गैरकानूनी और कार्रवाई योग्य है।
3. नियम और शर्तें
- आरोपी को न्यायिक हिरासत में सुरक्षित स्थान या जेल में रखा जाए।
- महिला और नाबालिग की न्यायिक हिरासत में विशेष सुरक्षा और निगरानी हो।
- मजिस्ट्रेट द्वारा तय अधिकतम हिरासत अवधि और सुरक्षा शर्तें सुनिश्चित की जाएं।
4. धारा 79 का उद्देश्य
- पुलिस से न्यायिक हिरासत में स्थानांतरण को कानूनी और न्यायिक निगरानी में रखना
- हिरासत प्रक्रिया में मानव अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित करना
- मजिस्ट्रेट और पुलिस की जिम्मेदारी और जवाबदेही बनाए रखना
5. संवैधानिक महत्व
धारा 79 अनुच्छेद 21 और 22 से जुड़ी हुई है:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अनुच्छेद 22: मजिस्ट्रेट की अनुमति और कानूनी निगरानी के बिना हिरासत गैरकानूनी
6. न्यायालय के दिशानिर्देश
D.K. Basu v. State of West Bengal
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस से न्यायिक हिरासत में स्थानांतरण केवल मजिस्ट्रेट की अनुमति से और शर्तों के अनुसार होना चाहिए।
- महिला और नाबालिग मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा और न्यायिक निगरानी आवश्यक है।
- यह आदेश हिरासत प्रक्रिया को मानव अधिकार-सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है।
7. महत्वपूर्ण बातें
- मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस से न्यायिक हिरासत में स्थानांतरण नहीं हो सकता।
- आरोपी के मानव अधिकार, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित हों।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सावधानी और सुरक्षित निगरानी हो।
- धारा 79 हिरासत प्रक्रिया को कानूनी, सुरक्षित और न्यायिक निगरानी वाली बनाती है।
इस प्रकार धारा 79 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि पुलिस से न्यायिक हिरासत में स्थानांतरण पूरी तरह कानूनी, सुरक्षित और मानव अधिकार-सुरक्षित हो। ⚖️
