Section 22 – Divorce on Renunciation of the World (संसार त्याग के आधार तलाक)
🪔 Hindu Marriage Act, 1955
Section 22 – Divorce on Renunciation of the World (संसार त्याग के आधार तलाक)
🔹 Section 22 का परिचय
Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 22 (Section 22) उन मामलों से संबंधित है जहाँ पति या पत्नी ने सांसारिक जीवन छोड़ दिया हो (Renunciation of the World) और इस कारण marriage असहनीय हो जाए।
इसे आम भाषा में कहा जा सकता है: एक spouse का सन्यास या सांसारिक जीवन से दूरी लेना।
🎯 Section 22 का उद्देश्य
- Marriage में सहज और स्थायी संबंध बनाए रखना
- यदि कोई spouse संसार त्यागता है, तो दूसरा spouse Divorce के लिए legal ground पा सके
- Family, children और legal rights की सुरक्षा करना
⚖️ Section 22 के तहत Divorce का आधार
Marriage तब तलाक के लिए ground बनती है यदि:
- कोई spouse संसार त्याग (Renunciation of the World / Sanyas) कर ले।
- इसके कारण विवाह सहनीय या संभव न रहे।
- Divorce के लिए यह contested divorce ground के रूप में अदालत में पेश किया जा सकता है।
📌 ध्यान दें:
- Section 22 केवल spouse द्वारा वास्तविक रूप से सांसारिक जीवन त्यागने पर लागू होता है।
- Temporary religious retreat या travel ground नहीं बनती।
🚸 Practical Examples (व्यावहारिक उदाहरण)
- पति या पत्नी ने पूर्ण रूप से सन्यास ले लिया और घर छोड़ दिया।
- वह spouse अब marital duties निभाने में सक्षम नहीं है।
- अदालत Section 22 के आधार पर Divorce grant कर सकती है।
💰 Legal Effect / Remedy
- Divorce legally granted हो सकती है।
- Maintenance / Alimony / Child Custody court discretion पर तय होती है।
- Court renunciation के कारण legal protection सुनिश्चित कर सकती है।
📝 संक्षेप में (Summary)
| बिंदु | विवरण |
| Section | 22 |
| Topic | Divorce on Renunciation of the World |
| अर्थ | संसारी जीवन त्याग के आधार तलाक |
| आवश्यकता | वास्तविक सन्यास या Renunciation, marriage असहनीय होना |
| Legal Effect | Divorce granted, Maintenance/Child Custody court discretion पर |
⚠️ Important Points
Section 22 सुनिश्चित करता है कि संसार त्याग Marriage में legal ground बन सकता है।
Divorce के लिए court में प्रमाण और verification अनिवार्य हैं।
⚖️ Legal Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी हेतु है। वास्तविक मामलों में divorce और संबंधित अधिकार court के विवेक और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
