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BNS धारा 17 – अकेले और मिलकर किया गया अपराध

जब कोई अपराध एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, तो सभी की जिम्मेदारी इस संहिता के अनुसार निर्धारित की जाती है।

BNS धारा 17 – मिलकर किया गया अपराध

जब कोई अपराध कई व्यक्तियों द्वारा समान मंशा से किया जाता है, तो प्रत्येक व्यक्ति उसी प्रकार उत्तरदायी होता है जैसे उसने स्वयं किया हो।