BNS धारा 31 – बार-बार अपराध करना

📘 BNS (भारतीय न्याय संहिता – Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023)

🧾 Section 31 (धारा 31) – बारबार अपराध करना

(Habitual Offender / Repeated Commission of Offence)

🟢 आसान मतलब:

अगर कोई व्यक्ति:

✔️ बार-बार अपराध करता है
✔️ एक ही तरह का अपराध बार-बार करता है
✔️ सज़ा मिलने के बाद भी अपराध नहीं छोड़ता
✔️ आदतन (habit) अपराधी बन जाता है

👉 तो कानून उसे आदतन अपराधी (Habitual Criminal) मानता है ⚖️

🧠 आम भाषा में:

अगर कोई बोले:

“इसका तो रोज़ का काम है चोरी करना”
“ये तो आदत से फ्रॉड करता है”
“हर साल जेल जाता है”

👉 कानून कहता है:
ये सामान्य अपराधी नहीं, आदतन अपराधी है ⚖️

📌 Simple Examples:

Example 1:

कोई व्यक्ति बार-बार चोरी के केस में पकड़ा जाता है
➡️ आदतन अपराधी

Example 2:

हर कुछ महीने में फ्रॉड करता है
➡️ आदतन अपराधी

Example 3:

हर बार जमानत पर बाहर आकर फिर अपराध
➡️ आदतन अपराधी

🧠 Core Rule:

बारबार अपराध = गंभीर अपराधी

⚖️ दंड (Punishment) – Detail में:

👉 Rule:

अगर कोई व्यक्ति बारबार अपराध करता है, तो:

🔹 उसकी सज़ा ज्यादा कठोर (Strict) होगी
🔹 सामान्य अपराधी से ज़्यादा सज़ा मिलेगी
🔹 जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है
🔹 लंबी जेल हो सकती है
🔹 निगरानी (Surveillance) में रखा जा सकता है

📌 सज़ा कैसे बढ़ती है?

🟡 पहली बार अपराध:

➡️ सामान्य सज़ा

🟡 दूसरी बार:

➡️ सज़ा ज़्यादा

🟡 तीसरी बार और आगे:

➡️ कठोर सज़ा
➡️ लंबी जेल
➡️ गंभीर अपराधी माना जाएगा

🧾 आसान शब्दों में:

Repeat Crime = Heavy Punishment

🚫 कब लागू नहीं होगा:

अगर:

  • पहली बार अपराध किया ❌
  • बहुत पुराने केस थे ❌
  • झूठे केस थे ❌
  • एक ही घटना में कई धाराएँ लगी ❌

👉 तो Section 31 लागू नहीं होगा ❌