अनुच्छेद 27 धार्मिक करों का निषेध

🔶 अनुच्छेद 27 — धार्मिक करों का निषेध

(Article 27 – Freedom from Payment of Taxes for Promotion of Any Particular Religion)

अनुच्छेद 27 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है जो राज्य को किसी भी धर्म के प्रचारप्रसार के लिए बाध्यकारी कर (compulsory tax) लगाने से रोकता है।
इसका उद्देश्य भारत को धर्मनिरपेक्ष (Secular) बनाए रखना है।

🟩 अनुच्छेद 27 क्या कहता है? (Main Provision)

➡️ किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर (tax) का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा,
जिसका उपयोग किसी विशेष धर्म या धार्मिक संस्था के प्रचारप्रसार के लिए किया जाए।

सरल शब्दों में—
👉 राज्य धर्म-प्रचार के लिए जनता से जबरन पैसा नहीं ले सकता।
👉 सरकारी कर का उपयोग केवल “सार्वजनिक उद्देश्य” (public purpose) के लिए किया जा सकता है।

🟦 अनुच्छेद 27 का उद्देश्य

  • करों का उपयोग केवल धर्मनिरपेक्ष उद्देश्यों के लिए करना
  • किसी भी धर्म को राज्य द्वारा विशेष लाभ न देना
  • धार्मिक मामलों में राज्य की तटस्थता बनाए रखना
  • नागरिकों को धार्मिक खर्च के लिए मजबूर न करना

🟥 अनुच्छेद 27 किन पर लागू होता है?

  • नागरिकों
  • विदेशियों
  • संगठनों
  • कंपनियों

👉 यानी हर व्यक्ति पर लागू होता है जो टैक्स देता है।

🟧 क्या अनुच्छेद 27 “सभी धार्मिक गतिविधियों में सरकारी खर्चको प्रतिबंधित करता है?

नहीं।
अनुच्छेद 27 सिर्फ उस स्थिति पर रोक लगाता है जहाँ—
➡️ कर विशेष रूप से धर्मप्रचार के लिए लिया जाए।

लेकिन निम्न परिस्थितियों में सरकारी खर्च अनुमति योग्य है, क्योंकि इनका उद्देश्य public welfare होता है:

✔ 1. धार्मिक स्थलों की सामान्य सुरक्षा, रखरखाव

उदाहरण:

  • मंदिर/मस्जिद/गुरुद्वारों के पास सड़क, बिजली, सफाई
  • ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का संरक्षण
    ➡️ यह कर द्वारा किया जा सकता है क्योंकि यह सार्वजनिक हित है।

✔ 2. धर्मों के बीच समानता बनाए रखने के लिए खर्च

राज्य किसी एक धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं,
बल्कि सभी के लिए सुविधाएँ देने के लिए खर्च कर सकता है।

✔ 3. त्योहारों के दौरान सुरक्षा/प्रबंधन

उदाहरण:

  • कांवड़ यात्रा, कुंभ मेला
  • ईद, मोहर्रम
  • क्रिसमस आयोजन
    ➡️ पुलिस, प्रशासन, सफाई — ये “public order” से जुड़ी सेवाएँ हैं, धर्म-प्रचार नहीं।

🟩 महत्वपूर्ण न्यायालयीय निर्णय (Landmark Judgments)

1. Commissioner H.R.E. vs. Sri Lakshmindra Thirtha Swamiar (1954)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—
➡️ यदि कर का उद्देश्य “धर्म-प्रचार” नहीं बल्कि
प्रशासन/धार्मिक प्रतिष्ठान का प्रबंधन है,
तो यह अनुच्छेद 27 का उल्लंघन नहीं।

2. Jagannath Ramanuj Das Case

मंदिरों के सामान्य प्रबंधन हेतु वसूले गए शुल्क अनुच्छेद 27 के विरुद्ध नहीं हैं,
क्योंकि उनका उद्देश्य “धर्म फैलाना” नहीं बल्कि व्यवस्था बनाए रखना है।

3. Kerala Education Bill Case

राज्य का उद्देश्य किसी विशेष धर्म को बढ़ावा न देना है।
Secularism = Equal Respect for All Religions.