जाँच के लिए पुलिस हिरासत और मजिस्ट्रेट की अनुमति
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 66
जाँच के लिए पुलिस हिरासत और मजिस्ट्रेट की अनुमति (Police Custody for Investigation with Magistrate’s Approval)
1. धारा 66 CrPC क्या है?
धारा 66 यह प्रावधान करती है कि जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है, तो पुलिस उसे जाँच के लिए हिरासत में रखने हेतु मजिस्ट्रेट से अनुमति ले सकती है।
इसका उद्देश्य है कि पुलिस हिरासत कानूनी, पारदर्शी और न्यायिक निगरानी में हो।
2. मजिस्ट्रेट की शक्ति
- मजिस्ट्रेट पुलिस को आदेश दे सकता है कि आरोपी विशेष अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए।
- हिरासत का आदेश केवल जाँच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए दिया जाता है।
- मजिस्ट्रेट आरोपी के मानव अधिकार और सुरक्षा का ध्यान रखता है।
3. पुलिस हिरासत के नियम
- हिरासत में आरोपी को अनावश्यक कठिनाई या अत्याचार नहीं दिया जाए।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सुरक्षा और निगरानी हो।
- हिरासत का समय केवल जाँच के लिए आवश्यक अवधि तक सीमित हो।
4. धारा 66 का उद्देश्य
- पुलिस हिरासत को कानूनी और न्यायिक निगरानी में रखना
- जाँच और सबूत इकट्ठा करने के लिए आरोपी तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना
- हिरासत प्रक्रिया को मानव अधिकार-सुरक्षित और पारदर्शी बनाना
5. संवैधानिक महत्व
धारा 66 अनुच्छेद 21 और 22 से संबंधित है:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अनुच्छेद 22: मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस हिरासत रखना गैरकानूनी
6. न्यायालय के दिशानिर्देश
D.K. Basu v. State of West Bengal
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत केवल आवश्यक और न्यायिक अनुमति से होनी चाहिए।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी आवश्यक है।
- यह आदेश पुलिस हिरासत को पारदर्शी और मानव अधिकार-सुरक्षित बनाता है।
7. महत्वपूर्ण बातें
- मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस हिरासत नहीं हो सकती।
- हिरासत में आरोपी के मानव अधिकार, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित हों।
- महिला और नाबालिग की हिरासत में विशेष सावधानी और सुरक्षित निगरानी हो।
- धारा 66 गिरफ्तार व्यक्ति की हिरासत प्रक्रिया को कानूनी, सुरक्षित और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाती है।
इस प्रकार धारा 66 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि पुलिस हिरासत कानूनी, सुरक्षित और न्यायिक निगरानी वाली हो। ⚖️







