BNS धारा 6 – न्यायालय के आदेश से किया गया काम
📘 BNS (भारतीय न्याय संहिता – Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023)
🧾 Section 6 (धारा 6) – न्यायालय के आदेश से किया गया काम
(Act done by a person by reason of a mistake of fact, believing himself justified by law / Act done under court order)
🟢 Section 6 का आसान मतलब:
अगर कोई व्यक्ति कोई काम करता है क्योंकि:
🔹 (1) उसे कोर्ट (Court) का आदेश मिला है
या
🔹 (2) उसे सच्चे दिल से (Good Faith) यह विश्वास है कि
उसे कानून या अदालत ने वह काम करने का अधिकार दिया है
👉 तो वह काम अपराध (Crime) नहीं माना जाएगा ❌
🧠 आम भाषा में समझो:
अगर कोई आदमी कहे:
“मैंने ये काम इसलिए किया क्योंकि अदालत ने आदेश दिया था”
या
“मुझे सच्चे मन से लगा कि कोर्ट/कानून ने मुझे ऐसा करने की इजाज़त दी है”
और वह बात:
- ईमानदारी से है (Good Faith) ✅
- धोखे की नीयत नहीं है ❌
- गलत फायदा उठाने की सोच नहीं है ❌
👉 तो वह व्यक्ति अपराधी नहीं माना जाएगा ✅
📌 Simple Examples:
✅ Example 1:
कोर्ट का आदेश:
“इस व्यक्ति को गिरफ़्तार करो”
पुलिस गिरफ़्तारी करती है
➡️ अपराध नहीं है
क्योंकि यह कोर्ट के आदेश से हुआ है।
✅ Example 2:
कोर्ट का आदेश:
“इस ज़मीन पर निर्माण रोक दो”
अधिकारी निर्माण रुकवाता है
➡️ अपराध नहीं है
क्योंकि न्यायालय का आदेश है।
✅ Example 3:
कोई अधिकारी कोर्ट के आदेश को सही समझकर
ईमानदारी से कोई काम करता है
➡️ अपराध नहीं माना जाएगा।
🚫 लेकिन ध्यान रखने वाली बात:
अगर कोई व्यक्ति:
- कोर्ट के नाम पर झूठ बोले ❌
- फर्जी आदेश दिखाए ❌
- आदेश का गलत इस्तेमाल करे ❌
- निजी फायदा उठाए ❌
👉 तो Section 6 की सुरक्षा नहीं मिलेगी ❌
और वह काम अपराध माना जाएगा ✅
⚖️ दंड (Punishment) की स्थिति:
❌ इस धारा में कोई दंड (Punishment) नहीं है
क्योंकि यह धारा भी सुरक्षा (Protection Clause) है
👉 यह बताती है कि कौन सा काम अपराध नहीं माना जाएगा।
