अनुच्छेद 37 राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (DPSP)
(Article 37 – Application of the Directive Principles of State Policy)
Article 37 भारतीय संविधान के भाग IV (Part IV) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुच्छेद है।
यह यह स्पष्ट करता है कि राज्य के नीति–निर्देशक तत्व (DPSP) का कानूनी दर्जा क्या है, उनका महत्व क्या है और राज्य पर उनकी बाध्यता किस प्रकार की है।
➡️ अगर Article 36 DPSP की परिभाषा है,
➡️ तो Article 37 DPSP की आत्मा (Soul) है।
🟩 Article 37 का व्यावहारिक महत्व (Practical Importance)
Article 37 के कारण ही—
- न्यूनतम मजदूरी कानून बने
- भूमि सुधार लागू हुए
- शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएँ शुरू हुईं
- महिला और बाल कल्याण योजनाएँ बनीं
- सामाजिक न्याय से जुड़े कानून बने
➡️ भले ही DPSP enforceable न हों,
➡️ लेकिन भारत का कल्याणकारी राज्य मॉडल इन्हीं पर आधारित है।
🟩 Article 37 का मूल पाठ (भावार्थ में)
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे,
लेकिन वे देश के शासन में मूलभूत (Fundamental) हैं
और राज्य का कर्तव्य होगा कि वह कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करे।
🟦 Article 37 के तीन मुख्य तत्व
Article 37 तीन बहुत महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट करता है—
1️⃣ DPSP न्यायालय में लागू नहीं किए जा सकते (Non-Justiciable)
- DPSP का उल्लंघन होने पर
नागरिक सीधे Supreme Court या High Court नहीं जा सकते। - DPSP को कानूनी अधिकार नहीं माना गया है।
➡️ इसलिए DPSP को Non-Justiciable कहा जाता है।
2️⃣ DPSP शासन के लिए मूलभूत हैं (Fundamental in Governance)
- Article 37 कहता है कि DPSP
देश के शासन की नींव हैं। - हर सरकार को—
- कानून बनाते समय
- नीतियाँ तय करते समय
- योजनाएँ लागू करते समय
DPSP को ध्यान में रखना चाहिए।
➡️ यानी DPSP Moral + Constitutional Obligation हैं।
3️⃣ राज्य का कर्तव्य है DPSP लागू करना
- भले ही DPSP enforceable न हों,
लेकिन राज्य का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है कि वह इन्हें लागू करे। - सरकार यह नहीं कह सकती कि—
“ये बाध्यकारी नहीं हैं, इसलिए लागू नहीं करेंगे।”
🟥 महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (Landmark Judgments)
1️⃣ State of Madras vs Champakam Dorairajan (1951)
- कोर्ट ने कहा—
DPSP, Fundamental Rights के ऊपर नहीं हो सकते।
2️⃣ Kesavananda Bharati Case (1973)
- DPSP संविधान के Basic Structure का हिस्सा हैं।
- FR और DPSP दोनों में संतुलन जरूरी।
3️⃣ Minerva Mills Case (1980)
- कोर्ट ने कहा—
FR और DPSP में सामंजस्य (Harmony) संविधान की आत्मा है। - किसी एक को खत्म करके दूसरा लागू नहीं किया जा सकता।








