अनुच्छेद 43B सहकारी समितियों का संवर्धन
(Article 43B – Promotion of Co-operative Societies)
Article 43B भारतीय संविधान के भाग IV (Directive Principles of State Policy) के अंतर्गत आता है।
यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह सहकारी समितियों (Co-operative Societies) के गठन, विकास और
स्वतंत्र कार्यप्रणाली को बढ़ावा दे।
➡️ यह अनुच्छेद आर्थिक लोकतंत्र और सामूहिक विकास की भावना को मजबूत करता है।
🟧 Article 43B के प्रमुख उद्देश्य
- सहकारी आंदोलन को मजबूत करना
- किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों को
सामूहिक आर्थिक शक्ति देना - ग्रामीण और शहरी विकास को बढ़ावा देना
- बिचौलियों और शोषण को कम करना
- आर्थिक आत्मनिर्भरता
🟩 Article 43B का इतिहास (Background)
- 97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2011
द्वारा Article 43B को संविधान में जोड़ा गया। - इसका उद्देश्य था—
👉 सहकारी आंदोलन को संवैधानिक समर्थन देना।
🟦 Article 43B का मूल भाव (Simple Meaning)
राज्य यह प्रयास करेगा कि—
- सहकारी समितियों का
स्वतंत्र, स्वायत्त और लोकतांत्रिक ढाँचा विकसित हो - वे स्वयंसेवी रूप से गठित हों
- उनका प्रबंधन पारदर्शी और पेशेवर हो
🟦 सहकारी समिति क्या है?
सहकारी समिति—
- लोगों का स्वैच्छिक संगठन होती है
- साझा हित के लिए बनाई जाती है
- “एक सदस्य – एक वोट” के सिद्धांत पर चलती है
- लाभ के साथ-साथ
सामाजिक कल्याण पर केंद्रित होती है
🟩 Article 43B और 97वाँ संविधान संशोधन
प्रमुख प्रावधान:
- सहकारी समितियों को
- लोकतांत्रिक नियंत्रण
- नियमित चुनाव
- पेशेवर प्रबंधन
- Part IX-B (Articles 243ZH–243ZT) जोड़ा गया
- सहकारी समितियों की
स्वायत्तता पर ज़ोर
🟥 न्यायालय की दृष्टि (Judicial Interpretation)
Union of India v. Rajendra N. Shah (2021)
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा—
सहकारी समितियाँ
लोकतांत्रिक और स्वायत्त संस्थाएँ हैं। - राज्य उनकी स्वायत्तता में
अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं कर सकता।







