पुलिस हिरासत से न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश
दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 64
पुलिस हिरासत से न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश (Remand to Judicial Custody)
1. धारा 64 CrPC क्या है?
धारा 64 यह प्रावधान करती है कि जब कोई आरोपी पुलिस हिरासत में होता है, तो मजिस्ट्रेट उसे सीधे न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजने का आदेश दे सकता है।
इसका उद्देश्य है कि पुलिस हिरासत का दुरुपयोग रोका जाए और आरोपी की सुरक्षा न्यायिक निगरानी में सुनिश्चित हो।
2. मजिस्ट्रेट की शक्ति
- मजिस्ट्रेट आरोपी को पुलिस हिरासत से सीधे जेल/न्यायिक हिरासत में भेज सकता है।
- पुलिस हिरासत में केवल जाँच या आवश्यक कारणों के लिए रखा जाए।
- मजिस्ट्रेट निर्णय लेते समय आरोपी के मानव अधिकार और सुरक्षा का ध्यान रखता है।
3. न्यायिक हिरासत के नियम
- न्यायिक हिरासत अधिकृत जेल या सुरक्षित स्थान में हो।
- हिरासत में आरोपी को अनावश्यक कठिनाई या अत्याचार से बचाया जाए।
- महिला और नाबालिग की न्यायिक हिरासत में विशेष सुरक्षा और महिला/बाल अधिकारी की निगरानी हो।
4. धारा 64 का उद्देश्य
- पुलिस हिरासत का अनावश्यक और मनमाना उपयोग रोकना
- आरोपी को सुरक्षित और न्यायिक निगरानी में रखना
- गिरफ्तारी और हिरासत प्रक्रिया को कानूनी और पारदर्शी बनाना
5. संवैधानिक महत्व
धारा 64 अनुच्छेद 21 और 22 से संबंधित है:
- अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा
- अनुच्छेद 22: मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस हिरासत या न्यायिक हिरासत में रखने का अनावश्यक विस्तार गैरकानूनी है
6. न्यायालय के दिशानिर्देश
D.K. Basu v. State of West Bengal
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को हिरासत भेजने का निर्णय लेते समय मानव अधिकार और सुरक्षा का ध्यान रखना अनिवार्य है।
- महिला और नाबालिग मामलों में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा जरूरी है।
- यह आदेश पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत को मानव अधिकार-सुरक्षित और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाता है।
7. महत्वपूर्ण बातें
- मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत से सीधे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे सकता है।
- हिरासत में आरोपी के मानव अधिकार, सुरक्षा और स्वास्थ्य की सुरक्षा हो।
- महिला और नाबालिग की न्यायिक हिरासत में विशेष सावधानी बरती जाए।
- धारा 64 गिरफ्तारी और हिरासत प्रक्रिया को कानूनी, पारदर्शी और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाती है।
इस प्रकार धारा 64 CrPC यह सुनिश्चित करती है कि आरोपी की पुलिस हिरासत केवल आवश्यक कारणों तक सीमित रहे और उसे सुरक्षित, न्यायिक और मानव अधिकार-सुरक्षित हिरासत में भेजा जाए। ⚖️











